गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे अधिक पसीना निकलता है। इस पसीने के माध्यम से शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम, पोटेशियम) बाहर निकल जाते हैं। यदि समय पर पानी या लिक्विड का सेवन न किया जाए, तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहते हैं।
1. अधिक पसीना आना:
गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए पसीना अधिक निकलता है। पसीने के साथ शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम, पोटैशियम) की हानि होती है। यदि इसकी भरपाई नहीं की जाए, तो डिहाइड्रेशन हो जाता है।
2. तरल पदार्थों का कम सेवन:
गर्मी में प्यास कम लगती है या लोग पानी पीने में लापरवाही करते हैं। इसके अलावा, चाय, कॉफी, या एल्कोहॉल जैसे ड्यूरेटिक पेय अधिक पीने से पेशाब के ज़रिए तरल पदार्थों की हानि बढ़ जाती है।
3. बढ़ी हुई शारीरिक गतिविधियाँ:
गर्मियों में लोग अक्सर बाहर घूमते या व्यायाम करते हैं, जिससे पसीना और ऊर्जा खर्च होती है। इस दौरान पर्याप्त पानी न पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है।
4. नमी वाली गर्मी (ह्यूमिडिटी):
अधिक नमी होने पर पसीना ठीक से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे शरीर का ठंडा होना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में शरीर अधिक पसीना निकालकर तापमान कम करने की कोशिश करता है, जिससे तरल पदार्थों की हानि बढ़ती है।
5. बच्चों और वृद्धों में जोखिम:
बच्चे प्यास का ध्यान नहीं रखते, जबकि वृद्धों में प्यास का एहसास कम होता है। इससे इन समूहों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक रहता है।
डिहाइड्रेशन से बचाव के उपाय
- नियमित अंतराल पर पानी पिएँ, भले ही प्यास न लगी हो।
- नारियल पानी, छाछ, या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS) जैसे इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय लें।
- धूप में ज्यादा समय बिताने से बचें और हल्के रंग के, ढीले कपड़े पहनें।
- कैफीन और एल्कोहॉल का सेवन सीमित करें।
मुख्य कारण:
- तेज धूप और लू लगना
- पसीने के ज़रिए अधिक फ्लूइड लॉस
- कम पानी पीना
- शारीरिक मेहनत (जैसे एक्सरसाइज या काम)
- तेज गर्मी में बाहर घूमना
लक्षण:
- मुंह सूखना
- चक्कर आना
- कमजोरी
- पेशाब का रंग गहरा होना
- थकान और सिर दर्द
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